“डर…”

डर से मत डर…
कुछ अलग कर…

 

6 अंगुलियों वाला कभी कलाकार नहीं बन पाएगा डर तुझे ये समझायेगा…
पर तू ये आत्मविश्वास दिखाएगा..
तू डर से आंख मिलाएगा…
डर से मत डर…
कुछ अलग कर…
डर का सामना कर…
आगे बढ़…
कुछ अलग कर…

 

 

जिंदगी के हर मोड़ पर तुझे ये दर्द सताएगा…
और उसी दर्द का फायदा बिना चूके य डर उठाएगा…
तुझसे कहेगा कि तू आगे कुछ नहीं कर पाएगा…
पर क्या वो लिख कर दे पाएगा कि तू हार जाएगा…
तेरी हर कमजोरी पर ये डर घर बनाएगा…
पर तू अपना हुनर दिखाएगा…
उसी कमजोरी को तू अपनी ताकत बना…
उस दिन ये डर तूझसे डर जाएगा…
डर का खेल निडर होकर खेल…
डर से मत डर…
आगे बढ़…
भुला दे डर…
कुछ अलग कर…

 

 

 

 

 

 

आपला परिवार नागेबाबा परिवार

 

 

 

 

 

 

लेखक – अज्ञात

 

 

 

 

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